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Sunday, August 5, 2018

प्रेमचंद: वे केवल लेखक नहीं एक सांस्कृतिक मशाल थे...

हमें इस बात पर गर्व करना चाहिए कि प्रेमचंद केवल हिंदी और हिंदुस्तान के ही महान लेखक नहीं हैं. उर्दू भाषी पाकिस्तान के भी हैं. आखिर वे कौन-से कारण हैं कि राष्ट्रीय राजनीति में एक-दूसरे से त्रस्त देशों में प्रेमचंद उसी तरह स्वीकृत और मान्य हैं जिस तरह मीर-ग़ालिब और फैज या फिर मंटो.

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