पूरे दो साल मैंने न सूरज का उगना देखा, न ढलना. बिस्तर पर पड़ा रहता. उठने के लिए दो लोगों का सहारा लेता. जब बाहर निकला तो हर जगह रिजेक्शन मिला. क्लब जैसी जगह पर व्हीलचेयर पर बैठे डीजे की कोई कल्पना भी नहीं कर पाता था.from Latest News लाइफ़ News18 हिंदी https://ift.tt/2w6oDRS
No comments:
Post a Comment