परदादा जी (स्व. लोटन राम) ने 1918 में इसे ‘चालू’ किया था. चावड़ी बाजार में गली चरखेवालां, कमर्शियल स्कूल के अंदर वे काले संदूक में कुल्चे. एक बड़े से भिगोने में उबले हुए छोले और पिसे हुए मसाले रखकर, पटरी लगाते थे.from Latest News लाइफ़ News18 हिंदी https://ift.tt/2Q5d2hT
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