1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भी पश्चिमी राजस्थान के बॉर्डर पर ग्रामीण पूरी तरह से सेना के साथ जुटे हुए थे. इस दौरान ग्रामीणों की ओर से की गई मदद के बाद सेना ने ग्रामीणों को एक ऐसा तोहफा दिया जो आज तक हजारों लोगों और लाखों मवेशियों की प्यास बुझा रहा है.from Latest News राजस्थान News18 हिंदी https://ift.tt/2SBmAOL
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